संयम क्या है हिन्दी में जानकारी (moderation meaning in hindi)|5 Best & Creative Thinks

नमस्कार दोस्तों आज हम अपने इस लेख में बात करेंगे कि संयम क्या है हिन्दी में जानकारी (moderation meaning in hindi) और हमें इसका किस प्रकार से पालन करना चाहिए और उससे हमसे जुड़े बहुत सारे अर्थ हम अपने इस पूरे लेख में समझेंगे और आपको हम बताएंगे कि आप को किस प्रकार से हर परिस्थिति में संयम रखना चाहिए। ओर यह हमारे लिए किस प्रकार आवश्यक है और जिस प्रकार नुकसान दायक है आज मैं आपको इस पूरे लेख में संयम से जुड़े हुए लेख लेकर आया हूं जो आपके लिए बहुत ही फायदेमंद है।

moderation meaning in hindi

संयम क्या है हिन्दी में जानकारी

संयम वह है जब अपने पास कोई वस्तु या कोई चीज उपलब्ध हैं। लेकिन हम अपने नियमों का पालन करने के लिए हम उस वस्तु का यूज नहीं करते हैं। क्योंकि हमारे नियम में ये है की उसका हम यूज़ नहीं कर सकते है। बल्कि वह चीज अपने पास उपलब्ध है।

moderation meaning in hindi

अगर हम सरल शब्दों में बात करें तो जैसे हमारे घर में खाना है जो ओवन में पड़ा हुआ है और हमें भूख लग रही हैं और हम उसे नहीं खा रहे हैं क्योंकि अपने घर का नियम है कि खाना सब साथ में खाते हैं इसलिए आप अपने नियमों को ना तोड़ कर खाना नहीं खाते हैं इसे ही संयम कहते हैं क्योंकि आपके पास खाना है फिर भी आप उसे नहीं खाना चाहते हैं। और आप अपने आप पर संयम रख रहे हैं। अगर आप अपने ऊपर संयम रख रहे हैं तो यह आपके लिए बहुत ही फायदेमंद होगा।

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अगर हम एक और उदाहरण देखें तो जैसे आपके घर में फ्रीज में चॉकलेट पड़े हुए हैं और आप घर पर अकेले हैं लेकिन आप उस चॉकलेट को नहीं खाते हैं क्योंकि वह चॉकलेट आप सबको मिल बांट कर खाना है और आप जो भी पसंद नहीं करते हैं कि आप अपने माता पिता को बिना बोले चॉकलेट खा लो तो यह संयम है जो आपको चॉकलेट खाने से मना कर रहा है और आप उसका पालन कर रहे हैं और आप चौकलेट को नहीं खाते हैं

संयम नहीं रखना (moderation nahi rakhna)

अगर किसी व्यक्ति के पास संयम नहीं होता है तो उसका जीवन अपने इच्छाओं के गुलाम बना रहता है या अपनी इंद्रियों का पालन करता है और उन्हीं को संतुष्ट करने में लगा रहता है लेकिन अपनी इच्छाओं का पूरा करना कभी भी संभव नहीं होता है।

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अगर आप संयम नहीं रखोगे तो आपकी इंद्रियां भी आपको गुलाम बना देगी और आपसे वह अपने लिए ही काम करवाने लगेगी इसलिए अगर आप इंद्रियों के गुलाम बन गए तो अपने जीवन के बहुमूल्य समय को वैसे ही गवा रहे हैं और अपने जीवन को बर्बाद कर रहे हैं इसलिए आप अपने जीवन के ईस बहुमूल्य समय को ऐसे ही व्यर्थ ना गुजारे और अपनी इंद्रियों पर संयम रखें जिससे आप समाज के लिए और अपने लिए कुछ कर सके

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अगर आप अपनी इंद्रियों पर संयम करना ठीक है। तो आपके लिए कोई भी कठिन नहीं होगा जिससे आपको और काम ज्यादा लगेगा अगर आप अपनी इंद्रियों पर संयम नहीं करना सीखे तो आपका बहुत ही जल्दी पतन हो सकता है।

आत्मनियंत्रण –

हर व्यक्ति के लिए आत्म नियंत्रण बहुत ही महत्वपूर्ण होता है आत्म नियंत्रण किसी भी व्यक्ति के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अपनी की गई कामना, व्यवहार और भावना पर नियंत्रण करने की क्षमता होती है इसे मनोविज्ञान द्वारा स्व नियंत्रण भी कहा जाता है

हम सब साधारण जीवन में आत्म नियंत्रण को तीन भागों में बांटते हैं :-
1) सहनशीलता
2) संयम
3) धैर्य

moderation meaning in hindi

1) सहनशीलता

सहनशीलता हर व्यक्ति के जीवन में एक बहुत महत्वपूर्ण होते हैं अगर व्यक्ति सहनशीलता रखना सीख जाता है तो उसको अपने जीवन में बहुत ही खुशियां मिलती है। उदाहरण जैसे हम कहीं शॉप पर गए हैं और हमारे पास ₹10 हैं और आपने यह पैसे दुकानदार को कुछ खाने के लिए दे दिए हैं

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और थोड़े टाइम में वह आपको यह बोलता है कि आपने मुझे ₹10 नहीं दिए हैं और आपको और कुछ खाने के लिए भी नहीं देता है और इसके अलावा आपके पास पैसे भी नहीं है तो आप अगर उसे बिना कुछ बोले अपने घर आ जाते हैं बिना कुछ खाए तो यह सहनशीलता है इसे हम सहनशीलता कह सकते हैं

2) संयम

किसी चीज के उपलब्ध होने पर भी हम अपने नियमों का पालन करने के लिए उसका प्रयोग नहीं करना संयम है।
संयम एक ऐसा गुण है जो मनुष्य के जीवन में खुशियों और सुखों से भर देता है । इंद्रिया संयम, वाणी का संयम, मन का संयम ही व्यक्ति को महान् बनाता है ।

3) धैर्य –

अगर कोई व्यक्ति किसी विषम परिस्थिति में अपने अंदर नकारात्मक सोच पर धैर्य रखता है और हमेशा सकारात्मक ही सोचता है और अपने कर्म को अच्छे से करता रहता है तो उसे ही हम धैर्य करते हैं कर्म करना ही सच्चा धैर्य होता है
हर व्यक्ति को अपने जीवन में यह 10 नियम का पालन करना चाहिए चाहे वह किसी भी धर्म जाति का हो

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1.विद्या,
2.सत्य
3.क्रोध न करना
4.आत्म-नियंत्रण
5.चोरी न करना
6.क्षमा
7.पवित्रता
8.इन्द्रिय
9.संयम
10.बुद्धि

परिश्रम के साथ धैर्य भी

हर व्यक्ति परिश्रम जरूर करता है लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो परिश्रम जरूर करते हैं लेकिन धैर्य नहीं रखते हैं हर व्यक्ति को परीश्रम करने के साथ-साथ धैर्य भी रखना चाहिए। महात्मा बुध ने एक बात अच्छी है जब वह एक गांव में अपने शिष्यों को उपदेश देने जा रहे थे तो वह रास्ते में निकल रहे थे।

और वहां जाते समय रास्ते में खड्डे खोद रखे थे तो एक शिष्य ने भगवान बुद्ध से पूछा कि यह गड्ढे क्यों खोद रखे है तो भगवान बुद्ध ने उसे जवाब दिया कि यहां पर कोई व्यक्ति पानी की तलाश कर रहा था इसलिए उसने यह सारे गड्ढे खोद रखे हैं तो फिर से पूछा कि इतने गड्ढे क्यू खोदे इसकी क्या जरूरत है तो फिर भगवान बुद्ध बोले की उस व्यक्ति ने परिश्रम करने के साथ-साथ अपना धैर्य नहीं रखा और वह गड्ढे खोदता गया

अगर वह एक ही गड्ढे खोदता और परिश्रम करता रहता तो उसे पानी मिल जाता लेकीन उसने धैर्य से काम नहीं किया और उसे पानी नही मिला इसलिए हर व्यक्ति को परिश्रम करने के साथ-साथ धैर्य भी रखना चाहिए।

मनुष्य को संयम रखने के फायदे

मनुष्य को संयम रखने से मनुष्य क्षीर, गंभीर बनता है और कोई भी निर्णय लेने में कोई गलती नहीं करता। मनुष्य के हर स्वाभाविक विकार भी इससे दूर होते हैं। धर्म के पालन में इससे स्थिर बुद्धि का संचालन होता है। ईर्ष्या, लोभ, मोह, क्रोध,द्वेष सब का नाश इसके द्वारा संभव हो सकता है। इसलिए हर व्यक्ति को संयम रखना चाहिए

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